Featured Post

समुद्र में पत्थर का पुल कैसे बनाया गया.........???*

 *समुद्र में पत्थर का पुल कैसे बनाया गया.........???*               लंका के राजदरबार में सन्नाटा था। रावण के सबसे चतुर गुप्तचर , शुक और सारण...

Tuesday, January 24, 2017

दंगल की रहस्यमय सफलता !

दंगल की रहस्यमय सफलता !


आमिर खान की नई फिल्म दंगल की पहले दिन की कमाई का आकड़ा था 50 करोड़। अलगे दिन 100, फिर 150, 200 और अभी हाल ही में 374 करोड़ का आकड़ा पार कर लिया। अगले हफ्ते तक 500 करोड़ भी पार कर ही जायेगा। कुछ इस प्रकार के आकड़े फिल्म pk के वक़्त भी प्रदर्शित किए गए थे। पर उस समय नोटबंदी नहीं हुई थी, लेकिन दंगल फिल्म नोटबंदी के समय प्रदर्शित हुई है इस लिए ये आकड़े संदेह पैदा करते है। कुछ समय पहले तक जो समाचार पत्र और न्यूज़ चैनल नोटबंदी से लोगों की परेशानी और बद हाली पर आंसू बहा रहे थे। जिनका मानना था की नोटबंदी से 99 प्रति शत जनता लाइन में खड़ी हो गई। लोग मर रहे है, आत्महत्या कर रहे है। एक महिला ने अपने बच्चों को मार कर आत्महत्या कर ली क्योंकि घर में राशन नहीं था। और सिर्फ 1 प्रति शत लोगों के पास पैसा है, 99 प्रति शत कंगाल है। अचानक से दंगल-दंगल करने लगे। हर तरफ वाहवाही, कमाई ही कमाई। पर मुझे कोई ये समझाए की जब जनता के पास पैसे नहीं है तो फिल्म देखने जा कौन रहा है ? सिर्फ 1 प्रति शत लोगों के दम पर 500 करोड़ कमाए जा सकते है? दरअसल फिल्मों के झूठे आकड़े प्रस्तुत किए जाते है। ये बात खुद अनुभवी फिल्म निर्माता-निर्देशक राकेश रोशन ने क्रिश३ के समय कही थी। जो आकड़े प्रदर्शित किए जाते है वो फर्जी होते है, सिर्फ फिल्म के प्रचार के लिए। क्यों की एक फिल्म जितना ज्यादा धन कमाती है दर्शकों की उत्सुकता उतनी ही बदती है। और ये आकड़े कमाई के नहीं बल्कि कुल बिक्री के होते है । मैं समझाता हूँ कैसे । अगर आप एक उत्पाद बनाते है और उस की लागत आती है 5 रुपये। अब अगर आप उसे 10 रुपये में बेचते है तो आप की कमाई कितनी हुई ? 10 रुपये ?पर 5 रुपये की तो लागत  है (वो पैसा जो आप पहले ही खर्च कर चुके है उत्पाद निर्माण पर ) अब अगर आप अपने उत्पाद को किसी दुकानदार के जरिये बेचते है और वो दुकानदार 2 रुपये अपने लाभ के कमाता है तो आपका कुल लाभ हुआ 3 रुपये  पर आप प्रचारित कर रहे है की आपके उत्पाद ने पहले ही दिन 10 रुपये कमाए, जो की गलत है । अगर एक फिल्म की लागत 100 करोड़ है तो अगर फिल्म ने 100 करोड़ कमा भी लिए तो फिल्म सफल हुई या असफल ? और इन कमाई गए 100 करोड़ में भी सारा लाभ फिल्म का नहीं होता । मान लो फिल्म की टिकट दर 200 रुपये है । और फिल्म देखते वक़्त आप चाय, काफी, नाश्ता , पिज्जा बर्गर , पॉपकार्न आदि पर भी खर्च करोगे । पार्किंग का शुल्क तो अनिवार्य ही है।  लगभग 200 इन सब पर खर्च कर दिया यानि 400 रुपये । अब फिल्म ने कुल कितने रुपये कमाए? 200 या 400? प्रचार के लिए यही दिखाया जायेगा की फिल्म की कमाई 400 रुपये है जबकि वास्तव में फिल्म ने तो सिर्फ 200 रुपये ही कमाए। ये बात ठीक है की दर्शक फिल्म के लिए आया तो ही  और सामान की बिक्री हुई पर इस खर्च को आप फिल्म की आय नहीं मान सकते । इस के अलावा सिनेमा मालिकों या मल्टीप्लेक्स मालिकों के खर्चे (बिजली, पानी वेतन आदि ) और उनका लाभ , इस के बाद वितरकों के भी फिल्म प्रदर्शित करवाने के खर्चे और लाभ , फिर फाइनेंसेर की लागत और मुनाफा आदि और सबसे अंत में निर्माता का लाभ भी निकालना होगा । फिल्म निर्माण से ले कर फिल्म के प्रदर्शन से जुड़े हर आदमी और संस्था के लागत और लाभ को निकाल कर जो धन बचता है वो होता है फिल्म का मुनाफा।  निर्माता समझदार होता है इस लिए वो फाईनेंसेर का धन फिल्मों में लगवाता है और वो मुनाफे के चक्कर में धन दे भी देता है फिर ये फिल्म वितरकों को बेच दी जाती है मतलब सारा घाटा वितरकों पर आ जाता है साथ ही साथ फिल्म के टीवी अधिकार भी प्रदर्शन से पहले ही बेच कर निर्माता धन कमा लेता है । टीवी चैनल वाले वो वैसे भी विज्ञापन से धन कमाते है । बड़े सितारे भी अपना धन पहली ही ले लेते है तो नुकसान उनका भी नहीं होता । ज्यादातर मामलों में सिनेमा मालिक/मल्टीप्लेक्स मालिकों या वितरकों को ही नुकसान झेलना पड़ता है यही कारण है की फिल्म उद्योग तो फल-फूल रहा है पर सिनेमा घर बंद हो रहे है । मल्टीप्लेक्स की हालत भी ज्यादा अच्छी नहीं है पर वहाँ एक साथ कोई फिल्में प्रदर्शित होती है और वहाँ मौजूद दूसरी सेवाओं से अपने नुकसान की भरपाई कर लेते है। कुछ सितारे अपनी फिल्म को सफल बनाने के लिए अनुभवी लोगों की सेवा लेते है जैसे शुरुआती दिनों में अगर फिल्म के टिकट नहीं बिक रहे तो ये लोग ऑनलाइन ही टिकट खरीदते है फिल्म की रिव्यु लिखते है एक दर्शक बन कर फिल्म का प्रचार प्रसार करते है खाली  सिनेमा हालो की बाहर हाउसफुल का बोर्ड लगाना तो एक पुराना रिवाज है अपने समर्थक फिल्मी लेखकों , कलाकारों, निर्माताओं-निर्देशकों या फिल्मी पत्रिकाओं के संपादकों, आलोचकों आदि से भी फिल्म के बारे में अच्छे लेख लिखवाकर भी प्रचार किया जाता है । एक फिल्म आई थी जोश इस फिल्म ने पहले 3 दिन में 100 प्रति शत कमाई की थी । मतलब ये की हर सिनेमाघर हाउसफुल था । पर 1 हफ्ते बाद ही आधे सिनेमा घरों ने इस फिल्म को हटा दिया। अब कोई बताये की ये फिल्म इतनी ही ज्यादा सफल थी तो हट क्यों गई ? इस ही तरह का एक वहम फिल्म कर्ज के लिए भी है। लोगों का  आज भी ये सोचते है की कर्ज फिल्म सफल फिल्म थी जबकि इस फिल्म का सिर्फ संगीत ही अत्यंत सफल रहा था पर फिल्म असफल हुई थी । आप किसी फिल्म की सफलता या असफलता की पुष्टि नहीं कर सकते। एक फिल्म टीवी पर कितनी जल्दी आ जाती है इस बात से फिल्म की हैसियत का पता जरूर चल जाता है। जैसे की शोले फिल्म टीवी पर 40 साल बाद आई थी । हम आपके है कौन 5 साल बाद टीवी पर ।आई हम दिल दे चुके सामान 2 साल बात आई जबकि pk फिल्म 3 महीने के बाद ही टीवी पर दिखाई जाने लगी। आप खुद ही अंदाजा लगा सकते है की कौन सी फिल्म कितनी सफल हुए है।
                 

No comments:

Post a Comment