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समुद्र में पत्थर का पुल कैसे बनाया गया.........???*

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Monday, January 30, 2017

काबिल ॠतिक से क्यों डर गए रईस शाहरुख ?

काबिल ॠतिक से क्यों डर गए रईस शाहरुख ?
शाहरुख़ खान घमंडी है। तुनक मिजाज और अड़ियल। ये बात हम तब से कह रहे है, जब से उन्होंने आईपीएल मैच के दौरान एक उम्रदराज सुरक्षा कर्मी से अभद्र व्यवहार किया था। पर हम जैसे लोगों को कुछ लोगों ने संघी, भाजपाई और हिन्दू आतंकवादी तक बोल दिया। पर अब तो ये खबर अखबारों में भी आ गई की शाहरुख़ ने वितरकों को डराया, धमकाया ताकि रईस को अधिक स्क्रीन मिले। अपने सभी संबंधों, व्यक्तियों और संस्थाओं का दबाव बना कर वितरकों और सिनेमा मालिकों से काबिल के मुकाबले ज्यादा स्क्रीन मांगी । नतीजा रईस को 60 प्रतिशत और काबिल को 40 प्रतिशत ही स्क्रीन मिली।
वितरक इस बात से भी डर गई की रईस का वितरण करने वाली एक कंपनी के पास बाहुबली 2 के वितरण अधिकार भी है और शर्त यही है की बाहुबली 2 चाहिए तो रईस दिखाओ। शाहरुख़ की धमकी की रोशन परिवार से अपने संबंधों की बजाय अपने व्यावसायिक हितों का ध्यान रखे। भारत में ये खेल पुराना है लोगों को व्यवहारिक बनाने के नाम पर स्वार्थी बनाया जा रहा है।
जब से शाहरुख़ की फिल्में फैन, दिलवाले आदि असफल हुई है तभी से वो डरे हुए है। ऊपर से रईस में कुछ दम भी नहीं था। यही कारण है की वो इस फिल्म के प्रदर्शन को टालते आ रहे थे। आखिरकार पूरे एक साल टालने के बाद इस फिल्म का प्रदर्शन हुआ। ये फिल्म किसी तरह चल जाये इस लिए अपनी चहेती माहिर खान को प्रचार से दूर रखा गया। बहाना ये की पाकिस्तान कलाकारों पर प्रतिबन्ध है, पर फिल्म तो बन चुकी थी फिल्म के ट्रेलर में तो वो दिखाई जा सकती थी। इस के बाद फिल्म के प्रचार की सारी जिम्मेदारी सनी लियोन पर डाल दी। फिल्म में एक आइटम सोंग सनी लियोन पर बनाया गया। गाना भी कोई नया नहीं कुर्बानी फिल्म का एक बेहद सफल गाना। फिल्म प्रचार के पहले हफ्ते तक सिर्फ इस एक गाने को ही दिखाया गया। शाहरुख़ खुद एक हफ्ते तक गायब रहे। सच है शाहरुख़ के इतने बुरे दिन आ गए की अपनी फिल्म को सफल करने के लिए उन्हें सनी लियोन की जरूरत पद गई।
उस के बाद ये स्क्रीन विवाद। अगर आप को अपनी फिल्म पर इतना ही विश्वास था तो बराबर-बराबर स्क्रीन बाँट कर देख लेते 60-40 करवाने की क्या जरूरत थी?  
पर इतना सब कुछ करने के बाद भी क्या हासिल हुआ? एक असफल फिल्म। काबिल 40 प्रतिशत स्क्रीन ले कर भी आप से आगे है और आप 60 प्रतिशत ले कर भी असफल ही हुए।
हालाँकि फिल्म ट्रेंड पंडित और आलोचक रईस को सफल बता रहे है कोमल नाहटा जैसे लोग कमाई के आकड़े भी दे रहे है पर इन आकड़ों में कितनी सच्चाई होती है ये सब जानते है। मेरा एक और ब्लॉग पड़ ले उस में विस्तार से लिखा हुआ है। और दर्शक इन को नहीं देखते। फिल्म दर्शकों के दिल में उतरनी चाहिए और काबिल इस में कामयाब रही। ट्रेंड पंडित हमेशा ही उन फिल्मों को सफल बताते है जिन्हें दर्शक नकार देते है। इन लोगों को खुद फिल्मों की जानकारी नहीं होती। अपने शहर के सिनेमा घर को देख कर ये पूरे देश के आकड़े बताने लग जाते है।
इस पूरे घटना क्रम पर रोशन परिवार ने जिस तरह से एक गरिमा पूर्ण खामोशी साध रखी हो वो काबिले तारीफ है। और यही गरिमा रोशन परिवार को दूसरे फिल्मी परिवारों से अलग करती है  

जहां तक अभिनय की बात की जाये तो शाहरुख़ का अभिनय वाही है जो उनकी हर फिल्म में होता है। अलग जगह, परिधान, और मेकअप आदि को हटा दे तो ये बताना मुश्किल है की आप रईस देख रहे है या दिलवाले, डॉन, आदि। अपराध जगत की फिल्म, एक अपराधी नायक आदि। सब कुछ हजारों बार देखा-सुना हुआ। जबकि काबिल में कहानी तो बदले की है पर ॠतिक और यामी को अँधा बना कर संजय गुप्ता ने अपने पुराने पाप धो लिए। एक अंधे व्यक्ति के प्रेम और बदले की कहानी कमाल कर देती है और उस पर ॠतिक का अभिनय तो लाजवाब है। जो दर्शक कोई मिल गया के दीवाने है वो लोग काबिल के भी दीवाने हो जायगे।             

Saturday, January 28, 2017

NitinSharma: आत्मा भाग 1

NitinSharma: आत्मा भाग 1: आत्मा भाग 1 आधी रात का वक्त हो चला था । दूर -दूर तक अँधेरे का राज था । अँधेरा इतना घना था की हाथ को हाथ दिखाई ना दे, और इस अँधेरे को...

आत्मा भाग 1

आत्मा भाग 1

आधी रात का वक्त हो चला था । दूर -दूर तक अँधेरे का राज था । अँधेरा इतना घना था की हाथ को हाथ दिखाई ना दे, और इस अँधेरे को चीर रही थी एक खुली जीप की हेड लाइट । जहां भी जीप की लाइट पड़ती वही कुछ नजर आता सिर्फ पल भर के लिए । जीप चालक एक महिला थी, स्टेप कट बाल, आधुनिक लिबास, पहने वो महिला 40 के आस पास की थी । आखेँ एक दम लाल पर वो लाली काम की थकान की नहीं थी , बल्कि शराब के नशे की थी । इतने नशे में होने पर भी जीप पर गजब का नियंत्रण था । जीप लगभग 80/100 की गति से  दोड रही थी । तभी अचानक लाइट की रोशनी में एक साया नजर आया ।  चटक काले रंग के  कपडे, खुले बाल, लाल आखेँ, सफ़ेद पुतलियाँ जैसे कोई भूत या आत्मा हो । एक लड़की का भयानक साया सिर्फ कुछ पल के लिए और यही पल काफी थे । जीप का संतुलन ख़राब करने के लिए । महिला चालक ने एक दम से ब्रेक लगाये और अपनी जीप को मोड़ दिया मुख्य मार्ग से एक सर्विस रोड पर । महिला अभी भी संघर्ष कर रही और लगभग 20 फूट की दूरी पर जा कर उसने अपनी गाड़ी पर पूरा नियंत्रण कर ही लिया था की अचानक उसका सिर पीछे की तरफ गिर गया । यूँ लगा मानो सिर और धड का कोई संबंध ही नहीं है और सिर कटा वो धड जीप को कैसे संभालता ? वो जीप कुछ ही दूर खड़े एक पेड़ से जा टकराई । एक भयानक हादसा या हत्या? कोई नहीं जानता । दूर-दूर तक वो साया अब नजर नहीं आ रहा था । अद्रश्य हो गया था ।
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सुबह के 8 बज चुके थे वही जंगल , जहां रात को एक महिला की हादसे में मौत हुई थी । चारों तरफ पुलिस । दुर्घटना स्थल को पुलिस ने कवर कर लिया था । फॉरेंसिक वाले सबूत तलाशने में जुटे थे । तभी एक पुलिस की जीप आ कर रुकी । जीप में कंसोली कस्बे का पुलिस प्रमुख आशीष प्रधान था । तेज कदमों से वो दुर्घटना ग्रस्त जीप की तरफ आकर मुआयना करने लगा । 
“क्या लगता है ?” प्रधान वही खड़े अपने हवलदार से बोला ।
“दुर्घटना है सर । ये देखिये ” हवलदार जगत राम ने इतना सा जवाब दे कर एक ड्राइविंग लाइसेंस प्रधान की तरफ बड़ा दिया ।
“गाड़ी में से ये पर्स मिला है । मरने वाली कमला डिसूजा है । पीटर डिसूजा की पत्नी ।
“ओह ।”  स्वाभाविक रूप से ये शब्द प्रधान के मुंह से निकले  “ वो कमीना तो पूरा पुलिस विभाग अपने सिर पर उठा लेगा । “
“हाँ सर, आप जानते तो हो ही इस औरत को । दारू पी कर गाड़ी चला रही होगी ठोक दी ।”
“पर वो नहीं मानेगा जगत , उस को  और एस पी साहब को सबूत देने पड़ेंगे । “ प्रधान परेशान था पर खुद ही बोला ।
“चलो ठीक है लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजो “  जगत को आगे की निर्देश दे कर प्रधान वापस अपनी जीप की तरफ जाने लगा तभी उसकी नजर जीप की पिछले हिस्से में पड़े सिर पर गई , वो वही ठिठक गया ।
अभी तक वो यही सोच रहा था की महिला का सिर पेड़ से टकराने के कारण कट गया और वो जंगल में कही पड़ा होगा पर सिर का पीछे की तरफ गिरना हजारों सवाल पैदा करता है ?.............
अधिक पढ़ने के लिए क्लिक करे या फिर मुझसे संपर्क करे 


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Tuesday, January 24, 2017

मेरी नई किताब ‘आत्मा’

मेरी नई किताब ‘आत्मा’
मैं नितिन शर्मा अपनी नई किताब ‘आत्मा’ ले कर हाजिर हूँ । मेरा ये नया उपन्यास रहस्य, रोमांच और छानबीन से भरपूर है । साथ ही इस नॉवेल में मनोरंजन और सामाजिक मुद्दे का भी ध्यान रखा है । और आप इस की ई-कॉपी सिर्फ 50 रुपये में प्राप्त कर सकते है। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:- नितिन शर्मा,  9729295413,  sumetjain3@gmail.com

मैं नितिन शर्मा (Nitin Sharma), मेरा मोबाइल नंबर (Mobile No.) है 9729295413 (call, sms, WhatsApp, Paytm) और मेरी ई-मेल आईडी (e-mail id) है sumetjain3@gmail.com

मैं अपने सभी दोस्तों से ये निवेदन करता हुआ की कृपा करके मेरी नई किताब ‘आत्मा’ के प्रचार-प्रसार में अपना सहयोग करें। संसाधनों के अभाव में मैं अपनी किताब की छपी हुई प्रतियाँ प्रकाशित नहीं करवा सकता पर आप सभी के लिए मेरी किताब की ebook उपलब्ध है। जिस की कीमत सिर्फ 50 रुपये रखी गई है, और मैं आशा करता हूँ की आप सब लोग मेरा सहयोग करेंगे। हिंदी में लिखी गई, रहस्य रोमांच से भरपूर इस नॉवेल में आप को वो सब कुछ मिलेगा जो आप को चाहिए। मुझे यकीन है की इस नॉवेल को पढ़ कर आप को बिलकुल भी ये महसूस नहीं होगा की आप के पैसे (50 रुपये) बर्बाद हो गए, बल्कि आप ये सोचेंगे की इस नॉवेल की कीमत इतनी कम क्यों है?  
इस किताब को प्राप्त करना भी आसान है। आप ऊपर बताये गए किसी भी तरीके से मुझ से संपर्क कर सकते है।
या फिर आप मुझे 50 रुपये का भुगतान कर सकते है अपने नाम, मोबाइल नंबर या ई-मेल आईडी के साथ और मैं आप को किताब भेज दूँगा। paytm के जरिये या किसी भी तरीके से भुगतान किया जा सकता है।
या फिर आप pothi.com के जरिये भी इस किताब का प्राप्त कर सकते है। किताब प्राप्त करने के लिए यहाँ क्लिक करें :
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कृपया करके अपने दोस्त की मदद कीजिये ताकि आगे भी मैं लगातार लेखन कार्य कर सकूँ। मेरे कुछ दोस्त ये किताब मुझ से मुफ्त में मांग रहे है । कृपया करके मुझे शर्मिंदा मत करें। कम से कम मेरी मेहनत का तो ख्याल करें । वैसे भी 50 रुपये कोई बड़ी कीमत नहीं होती। आप लोग मेरी किताब ख़रीदे और दूसरे लोगों को भी प्रेरित करें। इस किताब की बिक्री में मेरा सहयोग करें।
धन्यवाद 

मैं नितिन शर्मा अपनी नई किताब ‘आत्मा’ ले कर हाजिर हूँ

नमस्कार दोस्तों  
मैं नितिन शर्मा अपनी नई किताब ‘आत्मा’ ले कर हाजिर हूँ । मेरा ये नया उपन्यास रहस्य, रोमांच और छानबीन से भरपूर है । साथ ही इस नॉवेल में मनोरंजन और सामाजिक मुद्दे का भी ध्यान रखा है । और आप इस की ई-कॉपी सिर्फ 50 रुपये में प्राप्त कर सकते है । अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें :- नितिन शर्मा,  9729295413,  sumetjain3@gmail.com
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mari kitab aatma

अपनी किताब की 2 प्रति मैं बेच चूका है अभी तक। धन्यवाद उन पाठकों का जिन्होंने इस में रूचि दिखाई । कुछ लोगो को समझा में नहीं आ रहा ये ये किताब ‘आत्मा’ वो कसे प्राप्त कर सकते है । तो मैं पूरी विधि लिख रहा हाउ
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दंगल की रहस्यमय सफलता !

दंगल की रहस्यमय सफलता !


आमिर खान की नई फिल्म दंगल की पहले दिन की कमाई का आकड़ा था 50 करोड़। अलगे दिन 100, फिर 150, 200 और अभी हाल ही में 374 करोड़ का आकड़ा पार कर लिया। अगले हफ्ते तक 500 करोड़ भी पार कर ही जायेगा। कुछ इस प्रकार के आकड़े फिल्म pk के वक़्त भी प्रदर्शित किए गए थे। पर उस समय नोटबंदी नहीं हुई थी, लेकिन दंगल फिल्म नोटबंदी के समय प्रदर्शित हुई है इस लिए ये आकड़े संदेह पैदा करते है। कुछ समय पहले तक जो समाचार पत्र और न्यूज़ चैनल नोटबंदी से लोगों की परेशानी और बद हाली पर आंसू बहा रहे थे। जिनका मानना था की नोटबंदी से 99 प्रति शत जनता लाइन में खड़ी हो गई। लोग मर रहे है, आत्महत्या कर रहे है। एक महिला ने अपने बच्चों को मार कर आत्महत्या कर ली क्योंकि घर में राशन नहीं था। और सिर्फ 1 प्रति शत लोगों के पास पैसा है, 99 प्रति शत कंगाल है। अचानक से दंगल-दंगल करने लगे। हर तरफ वाहवाही, कमाई ही कमाई। पर मुझे कोई ये समझाए की जब जनता के पास पैसे नहीं है तो फिल्म देखने जा कौन रहा है ? सिर्फ 1 प्रति शत लोगों के दम पर 500 करोड़ कमाए जा सकते है? दरअसल फिल्मों के झूठे आकड़े प्रस्तुत किए जाते है। ये बात खुद अनुभवी फिल्म निर्माता-निर्देशक राकेश रोशन ने क्रिश३ के समय कही थी। जो आकड़े प्रदर्शित किए जाते है वो फर्जी होते है, सिर्फ फिल्म के प्रचार के लिए। क्यों की एक फिल्म जितना ज्यादा धन कमाती है दर्शकों की उत्सुकता उतनी ही बदती है। और ये आकड़े कमाई के नहीं बल्कि कुल बिक्री के होते है । मैं समझाता हूँ कैसे । अगर आप एक उत्पाद बनाते है और उस की लागत आती है 5 रुपये। अब अगर आप उसे 10 रुपये में बेचते है तो आप की कमाई कितनी हुई ? 10 रुपये ?पर 5 रुपये की तो लागत  है (वो पैसा जो आप पहले ही खर्च कर चुके है उत्पाद निर्माण पर ) अब अगर आप अपने उत्पाद को किसी दुकानदार के जरिये बेचते है और वो दुकानदार 2 रुपये अपने लाभ के कमाता है तो आपका कुल लाभ हुआ 3 रुपये  पर आप प्रचारित कर रहे है की आपके उत्पाद ने पहले ही दिन 10 रुपये कमाए, जो की गलत है । अगर एक फिल्म की लागत 100 करोड़ है तो अगर फिल्म ने 100 करोड़ कमा भी लिए तो फिल्म सफल हुई या असफल ? और इन कमाई गए 100 करोड़ में भी सारा लाभ फिल्म का नहीं होता । मान लो फिल्म की टिकट दर 200 रुपये है । और फिल्म देखते वक़्त आप चाय, काफी, नाश्ता , पिज्जा बर्गर , पॉपकार्न आदि पर भी खर्च करोगे । पार्किंग का शुल्क तो अनिवार्य ही है।  लगभग 200 इन सब पर खर्च कर दिया यानि 400 रुपये । अब फिल्म ने कुल कितने रुपये कमाए? 200 या 400? प्रचार के लिए यही दिखाया जायेगा की फिल्म की कमाई 400 रुपये है जबकि वास्तव में फिल्म ने तो सिर्फ 200 रुपये ही कमाए। ये बात ठीक है की दर्शक फिल्म के लिए आया तो ही  और सामान की बिक्री हुई पर इस खर्च को आप फिल्म की आय नहीं मान सकते । इस के अलावा सिनेमा मालिकों या मल्टीप्लेक्स मालिकों के खर्चे (बिजली, पानी वेतन आदि ) और उनका लाभ , इस के बाद वितरकों के भी फिल्म प्रदर्शित करवाने के खर्चे और लाभ , फिर फाइनेंसेर की लागत और मुनाफा आदि और सबसे अंत में निर्माता का लाभ भी निकालना होगा । फिल्म निर्माण से ले कर फिल्म के प्रदर्शन से जुड़े हर आदमी और संस्था के लागत और लाभ को निकाल कर जो धन बचता है वो होता है फिल्म का मुनाफा।  निर्माता समझदार होता है इस लिए वो फाईनेंसेर का धन फिल्मों में लगवाता है और वो मुनाफे के चक्कर में धन दे भी देता है फिर ये फिल्म वितरकों को बेच दी जाती है मतलब सारा घाटा वितरकों पर आ जाता है साथ ही साथ फिल्म के टीवी अधिकार भी प्रदर्शन से पहले ही बेच कर निर्माता धन कमा लेता है । टीवी चैनल वाले वो वैसे भी विज्ञापन से धन कमाते है । बड़े सितारे भी अपना धन पहली ही ले लेते है तो नुकसान उनका भी नहीं होता । ज्यादातर मामलों में सिनेमा मालिक/मल्टीप्लेक्स मालिकों या वितरकों को ही नुकसान झेलना पड़ता है यही कारण है की फिल्म उद्योग तो फल-फूल रहा है पर सिनेमा घर बंद हो रहे है । मल्टीप्लेक्स की हालत भी ज्यादा अच्छी नहीं है पर वहाँ एक साथ कोई फिल्में प्रदर्शित होती है और वहाँ मौजूद दूसरी सेवाओं से अपने नुकसान की भरपाई कर लेते है। कुछ सितारे अपनी फिल्म को सफल बनाने के लिए अनुभवी लोगों की सेवा लेते है जैसे शुरुआती दिनों में अगर फिल्म के टिकट नहीं बिक रहे तो ये लोग ऑनलाइन ही टिकट खरीदते है फिल्म की रिव्यु लिखते है एक दर्शक बन कर फिल्म का प्रचार प्रसार करते है खाली  सिनेमा हालो की बाहर हाउसफुल का बोर्ड लगाना तो एक पुराना रिवाज है अपने समर्थक फिल्मी लेखकों , कलाकारों, निर्माताओं-निर्देशकों या फिल्मी पत्रिकाओं के संपादकों, आलोचकों आदि से भी फिल्म के बारे में अच्छे लेख लिखवाकर भी प्रचार किया जाता है । एक फिल्म आई थी जोश इस फिल्म ने पहले 3 दिन में 100 प्रति शत कमाई की थी । मतलब ये की हर सिनेमाघर हाउसफुल था । पर 1 हफ्ते बाद ही आधे सिनेमा घरों ने इस फिल्म को हटा दिया। अब कोई बताये की ये फिल्म इतनी ही ज्यादा सफल थी तो हट क्यों गई ? इस ही तरह का एक वहम फिल्म कर्ज के लिए भी है। लोगों का  आज भी ये सोचते है की कर्ज फिल्म सफल फिल्म थी जबकि इस फिल्म का सिर्फ संगीत ही अत्यंत सफल रहा था पर फिल्म असफल हुई थी । आप किसी फिल्म की सफलता या असफलता की पुष्टि नहीं कर सकते। एक फिल्म टीवी पर कितनी जल्दी आ जाती है इस बात से फिल्म की हैसियत का पता जरूर चल जाता है। जैसे की शोले फिल्म टीवी पर 40 साल बाद आई थी । हम आपके है कौन 5 साल बाद टीवी पर ।आई हम दिल दे चुके सामान 2 साल बात आई जबकि pk फिल्म 3 महीने के बाद ही टीवी पर दिखाई जाने लगी। आप खुद ही अंदाजा लगा सकते है की कौन सी फिल्म कितनी सफल हुए है।