काबिल ॠतिक से क्यों डर गए रईस शाहरुख ?
शाहरुख़ खान घमंडी है। तुनक मिजाज और अड़ियल। ये
बात हम तब से कह रहे है, जब से उन्होंने आईपीएल मैच के दौरान एक उम्रदराज सुरक्षा
कर्मी से अभद्र व्यवहार किया था। पर हम जैसे लोगों को कुछ लोगों ने संघी, भाजपाई और
हिन्दू आतंकवादी तक बोल दिया। पर अब तो ये खबर अखबारों में भी आ गई की शाहरुख़ ने वितरकों
को डराया, धमकाया ताकि रईस को अधिक स्क्रीन मिले। अपने सभी संबंधों, व्यक्तियों और
संस्थाओं का दबाव बना कर वितरकों और सिनेमा मालिकों से काबिल के मुकाबले ज्यादा
स्क्रीन मांगी । नतीजा रईस को 60 प्रतिशत और काबिल को 40 प्रतिशत ही स्क्रीन मिली।
वितरक इस बात से भी डर गई की रईस का वितरण करने
वाली एक कंपनी के पास बाहुबली 2 के वितरण अधिकार भी है और शर्त यही है की बाहुबली 2
चाहिए तो रईस दिखाओ। शाहरुख़ की धमकी की रोशन परिवार से अपने संबंधों की बजाय अपने व्यावसायिक
हितों का ध्यान रखे। भारत में ये खेल पुराना है लोगों को व्यवहारिक बनाने के नाम
पर स्वार्थी बनाया जा रहा है।
जब से शाहरुख़ की फिल्में फैन, दिलवाले आदि असफल
हुई है तभी से वो डरे हुए है। ऊपर से रईस में कुछ दम भी नहीं था। यही कारण है की
वो इस फिल्म के प्रदर्शन को टालते आ रहे थे। आखिरकार पूरे एक साल टालने के बाद इस
फिल्म का प्रदर्शन हुआ। ये फिल्म किसी तरह चल जाये इस लिए अपनी चहेती माहिर खान को
प्रचार से दूर रखा गया। बहाना ये की पाकिस्तान कलाकारों पर प्रतिबन्ध है, पर फिल्म
तो बन चुकी थी फिल्म के ट्रेलर में तो वो दिखाई जा सकती थी। इस के बाद फिल्म के
प्रचार की सारी जिम्मेदारी सनी लियोन पर डाल दी। फिल्म में एक आइटम सोंग सनी लियोन
पर बनाया गया। गाना भी कोई नया नहीं कुर्बानी फिल्म का एक बेहद सफल गाना। फिल्म
प्रचार के पहले हफ्ते तक सिर्फ इस एक गाने को ही दिखाया गया। शाहरुख़ खुद एक हफ्ते
तक गायब रहे। सच है शाहरुख़ के इतने बुरे दिन आ गए की अपनी फिल्म को सफल करने के
लिए उन्हें सनी लियोन की जरूरत पद गई।
उस के बाद ये स्क्रीन विवाद। अगर आप को अपनी
फिल्म पर इतना ही विश्वास था तो बराबर-बराबर स्क्रीन बाँट कर देख लेते 60-40
करवाने की क्या जरूरत थी?
पर इतना सब कुछ करने के बाद भी क्या हासिल हुआ? एक
असफल फिल्म। काबिल 40 प्रतिशत स्क्रीन ले कर भी आप से आगे है और आप 60 प्रतिशत ले
कर भी असफल ही हुए।
हालाँकि फिल्म ट्रेंड पंडित और आलोचक रईस को सफल
बता रहे है कोमल नाहटा जैसे लोग कमाई के आकड़े भी दे रहे है पर इन आकड़ों में कितनी सच्चाई
होती है ये सब जानते है। मेरा एक और ब्लॉग पड़ ले उस में विस्तार से लिखा हुआ है।
और दर्शक इन को नहीं देखते। फिल्म दर्शकों के दिल में उतरनी चाहिए और काबिल इस में
कामयाब रही। ट्रेंड पंडित हमेशा ही उन फिल्मों को सफल बताते है जिन्हें दर्शक नकार
देते है। इन लोगों को खुद फिल्मों की जानकारी नहीं होती। अपने शहर के सिनेमा घर को
देख कर ये पूरे देश के आकड़े बताने लग जाते है।
इस पूरे घटना क्रम पर रोशन परिवार ने जिस तरह से
एक गरिमा पूर्ण खामोशी साध रखी हो वो काबिले तारीफ है। और यही गरिमा रोशन परिवार
को दूसरे फिल्मी परिवारों से अलग करती है
जहां तक अभिनय की बात की जाये तो शाहरुख़ का
अभिनय वाही है जो उनकी हर फिल्म में होता है। अलग जगह, परिधान, और मेकअप आदि को
हटा दे तो ये बताना मुश्किल है की आप रईस देख रहे है या दिलवाले, डॉन, आदि। अपराध
जगत की फिल्म, एक अपराधी नायक आदि। सब कुछ हजारों बार देखा-सुना हुआ। जबकि काबिल
में कहानी तो बदले की है पर ॠतिक और यामी को अँधा बना कर संजय गुप्ता ने अपने
पुराने पाप धो लिए। एक अंधे व्यक्ति के प्रेम और बदले की कहानी कमाल कर देती है और
उस पर ॠतिक का अभिनय तो लाजवाब है। जो दर्शक कोई मिल गया के दीवाने है वो लोग
काबिल के भी दीवाने हो जायगे।