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समुद्र में पत्थर का पुल कैसे बनाया गया.........???*

 *समुद्र में पत्थर का पुल कैसे बनाया गया.........???*               लंका के राजदरबार में सन्नाटा था। रावण के सबसे चतुर गुप्तचर , शुक और सारण...

Friday, August 25, 2017

यही फर्क है कांग्रेस और बीजेपी में।

यही फर्क है कांग्रेस और बीजेपी में। कांग्रेस सरकार 10 साल तक राम रहीम वाले मुद्दे को दबा कर बैठी रही। अदालत से तारीख र तारीख लेती रही। मुद्दा खत्म नहीं किया ताकि डेरा समर्थक नाराज ना हो जाए वोट बैंक बना रहे। बस मुद्दा सरकाते रहो हल मत होने दो। जबकि बीजेपी ने मुदा खत्म ही करवा दिया। डेरा समर्थको के वोट मिले या ना मिले कम से काम एक मुद्दा तो खत्म हो। कांग्रेस समस्या को टालते रहने में यकीन करती है और बीजेपी समस्या को खत्म करने में। जो लोग ये दावा करते थे की हरियाणा में बीजेपी की जीत डेरा प्रमुख के कारण हुई है। वो भी देख ले। अगर बीजेपी और डेरा में कोई समझौता हुआ होता तो आड़ डेरा प्रमुख बरी हो जाता। आप ये भी नहीं बोल सकते की फैसला अदालत ने किया है। अदालते आजाद है उन पर सरकार का कोई दबाव काम नहीं करता आदि क्यों की चोटाला की सजा के वक़्त आप ही लोग शोर मचा रहे थे की अदालत को जज को सरकार ने(बीजेपी) ने खरीद लिया। लालू, असीमानंद, पुराहित के वक़्त भी यही शोर मचा था की सरकार बीजेपी की है। जज पर दवाब था। अदालत को खरीद लिया था आदि-आदि। अब एक बात तो साफ़ है की सोनिया-राहुल भी जेल जाएँगे। अहमद बुखारी का नंबर भी आने वाला है। सब तैयार रहना। बीजेपी सरकार मुद्दों को जड़ से ख़त्म करती है। सरकाती नहीं है।                           

Tuesday, August 22, 2017

25 अगस्त को चार फिल्में रिलीज हो रही है। और ये है उनके नतीजे:

25 अगस्त को चार फिल्में रिलीज हो रही है। और ये है उनके नतीजे:
1. “स्निफ” फिल्म तो चलेगी ही नहीं। ये तो सिर्फ नेशनल अवार्ड लेने के लिए बनाई है अमोल गुप्ते ने।
2. “कैदी बैंड” यशराज की फिल्म होंगी पर हिट नहीं होने वाली। आदित्य चोपड़ा अपने संसाधन बर्बाद कर रहे है। 
3. “ए जेंटलमैन” जो हाल बैंग-बैंग का हुआ था वही होंगा। 
4. “बाबूमोशाय बंदूकबाज” नवजुदीन की फिल्म है। बजट निकाल ले ये ही बहुत है। 
5. “The Rally” फ्लॉप फिल्म है। पता नहीं बनाई ही क्यों?

Friday, August 18, 2017

कांग्रेस की लगातार हार, कौन है जिम्मेदार?

कांग्रेस की लगातार हार, कौन है जिम्मेदार?
बिहार के साथ ही एक और राज्य कांग्रेस के हाथ से निकल गया। हालाँकि बिहार में सरकार लालू-नितीश की थी लेकिन महागठबंधन का हिस्सा होने के कारण कुछ मलाई तो कांग्रेस के पास भी आ रही थी, अब वो भी गई।
ज्यादातर लोग भाजपा को मोदी को या अमित शाह को कांग्रेस के इस पतन का कारण मानते है। कुछ लोग सोनिया गाँधी के पुत्र मोह को भी इस असफलता का कारण मानते है। इसलिए प्रियंका को लाने की मांग करते है।वैसे ही जैसे कुछ साल पहले राहुल को लाने की मांग करते थे। वो आए और तब से लेकर लगातार 27 चुनावों में हार कर अपनी योग्यता का प्रदर्शन कर चुके है।
अगर किसी नेता के नेतृत्व में कोई दल लगातार 27 चुनाव हार जाता है तो उस नेता का राजनितिक जीवन तो खत्म ही हो जाता है। पर कांग्रेस पार्टी तो गाँधी परिवार पर ही जिन्दा है और यही है कांग्रेस के पतन का कारण। दरअसल अपनी हार का कारण कांग्रेस पार्टी चाहे हिन्दुत्व को माने या हिन्दू आतंकवाद को दोष दे , हिन्दू वोटो के ध्रुवीकरण का बहाना बनाए या हिंदू वोटबैंक का राग अलापे कोई फर्क नहीं पड़ता कांग्रेस के पतन की शुरुआत तो उसी दिन हो गई थी जिस दिन इस देश का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था। और गाँधी-नेहरू जैसे नेता मूक दर्शक बने रहे। बहुत ही मंद गति से और सतह के नीचे पतन शुरू हो गया था जो अब तेज हो गया है और नजर भी आने लगा है। उस काल में मिडिया आदि भी तो इतना प्रभावशाली नहीं था। सब कुछ सरकारी नियंत्रण में था। इसलिए कुछ पता नहीं चलता था। भगत सिंह की फासी का विरोध ना करके, और फिर कांग्रेस में ही आंतरिक लोकतंत्र की हत्या कर अपनी कब्र खोद लीइतिहास पर नजर डाले 1939, जबलपुर अधिवेशन में बहुमत द्वारा चुने गए सुभाष चंद्र बोस को गाँधी ने अपने कथित प्रभाव का प्रयोग करके इस्तीफा देने के लिए मजबूर कर दिया। ये कांग्रेस पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र की हत्या थी जो गाँधी और नेहरू ने अपनी जिद पूरी करने के लिए की। क्यों की अध्यक्ष पद पर वो अपना आदमी बिठाना चाहते थे। इस के बाद एक बार फिर आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पद के लिए भी अपने प्रिय नेहरू को बनाने के लिए बहुमत का गला घोटा गया।  गांधी ने उस वक़्त बड़े साफ तौर अपना समर्थन नेहरू के पक्ष में जाहिर कर दिया था। भारत का भावी प्रधान मंत्री बनने की उम्मीदवारी की आखिरी तिथि 29 अप्रैल 1946 थी। यह नामांकन 15 राज्यों की कांग्रेस की क्षेत्रीय इकाइयों द्वारा किया जाना था। राज्य की कांग्रेस समिति ने नेहरू के नाम का समर्थन नहीं किया। बल्कि 15 में से 12 राज्यों से सरदार पटेल का नाम कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावित किया गया। बाकी 3 राज्यों ने किसी का भी नाम आगे नहीं आया। स्पष्ट है कि सरदार पटेल के पास निर्विवाद समर्थन हासिल था जो उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने के लिए पर्याप्त था। इसे गांधी ने एक चुनौती के तौर पर लिया।   सरदार पटेल की जगह  नेहरू को कांग्रेस का अध्यक्ष बना कर पार्टी में परिवारवाद और वंशवाद की नीव डाल दी। और इस तरह कांग्रेस का पतन निश्चित कर दिया। दरअसल वो काल जिसे हम कांग्रेस का स्वर्ण काल कहते है वो इसलिए की इस पार्टी का कोई विकल्प ही नहीं था। कोई नेता नहीं था। कांग्रेस गाँधी-नेहरू परिवार की छवि में जकड गई है। इस के बाद इंदिरा नेहरू जो फिरोज खान से विवाह कर के इंदिरा गाँधी बन गई थी(फिरोज खान को नेहरू पसंद नहीं करते थे इसलिए गाँधी जी ने फिरोज को क़ानूनी तौर पर गोद ले लिया और इस प्रकार फिरोज खान फिरोज गाँधी बन गया। और नेहरू की आपति भी खत्म हो गई) और इस प्रकार गाँधी नेहरू नाम अब सिर्फ गाँधी परिवार बन गया। दरअसल कांग्रेस की समस्या ही यही है की ये सिर्फ एक परिवार पर ही निर्भर है। कांग्रेस प्रमुख का पद एक ही वंश के लिए आरक्षित है। अगर ऐसा नहीं है तो कोई बाते की सीताराम केसरी के कांग्रेस अध्यक्ष रहते दो चुनाव हुए जिस में कांग्रेस हारी नतीजा उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। जबकि सोनिया-राहुल के नेत्रत्व में कांग्रेस 24 चुनाव हार चुकी है। किसे निकाला गया है पार्टी से बाहर? वो सभी कांग्रेसी नेता जो राहुल-प्रियंका को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे है वो जरा बताए की कांग्रेस के बाकि नेता क्या योग्य नहीं  है? अहमद पटेल, कपिल सिब्बल, गुलाम नबी आजाद, गोपाल कृष्ण गाँधी, अनिल शास्त्री, अभिषेक मनु सिंघवी आदि नेता क्या कांग्रेस में घास काटने का काम करते है? क्या इनमे कांग्रेस अध्यक्ष बनने की योग्यता नहीं है? जब तक कांग्रेस में एक परिवार की चापलूसी बंद नहीं होगी उसका हाल यही रहेगा। अभी आप के पास राहुल है , प्रियंका है फिर उसके बच्चे रोहन और रेहान है। मजे की बात ये की इनके नाम के पीछे भी वाड्रा की जगह गाँधी ही लगता है।  
                

Tuesday, August 8, 2017

मेरी किताब ‘इतिहास और मिलावट’ का एक अंश :-

मेरी किताब ‘इतिहास और मिलावट’ का एक अंश :-
किसी ने भी नीच कुल के(महादलित वर्तमान कालखंड के अनुसार और कुछ इतिहासकार इन्हें ही मूल निवासी भी मानते है और ब्राहमण आर्य होते है) चन्द्रगुप्त मोर्य की शिक्षा का विरोध नहीं किया। बल्कि ब्राहमणों की तरह एक चोटी और जनेऊ धारण करवाई, जो हर बच्चे के साथ होता था। गुरुकुल में ही सब के साथ खाना, भिक्षा मांगना, पढना और हथियार प्रशिक्षण आदि, कही कोई भी भेद नहीं। ये कौन सी दुनिया थी, हमारे इतिहासकारों की लिखी गई दुनिया से एक दम अलग। और फिर विष्णुगुप्त की सहायता और योजनाओ से ही चन्द्रगुप्त मोर्य मगध के ब्राहमण राजा घननंद को सत्ता से हटा कर खुद अखंड भारत का सम्राट बना। मतलब एक ब्राहमण ने दुसरे ब्राहमण को सता से निकाल कर एक शुद्र को पुरे भारत का चक्रवर्ती सम्राट बना दिया।
पूरी पुस्तक खरीदने के लिए मुझे whatsapp पर अपना पूरा पता पिन कोड के साथ भेजें और साथ ही 100 रूपये paytm से भेजें। 100 रूपये प्राप्त होने के बाद ही किताब भेजी जाएगी। कोरियर शुल्क का भुगतान, कोरियर रसीद (AWB) प्राप्त करने के बाद आपको करना होंगा।
To buy the whole book send me your complete address on the whatsapp with PIN code as well as send it from Rs 100 paytm. The book will be sent only after getting 100 rupees. After receiving the courier receipt (AWB), you will have to pay the courier fee.
Nitin Sharma
+91- 9729295413
Sumetjain3@gmail.com

Friday, August 4, 2017

NitinSharma: आप किसी भी धर्म के अनुयाई हो।

NitinSharma: आप किसी भी धर्म के अनुयाई हो।: आप किसी भी धर्म के अनुयाई हो। अपने धर्म ग्रंथ में लिखित इतिहास पढ़े। फिर भारत की शिक्षा प्रणाली द्वारा संचालित इतिहासकारों की पाठ्य पुस्तक ...

आप किसी भी धर्म के अनुयाई हो।

आप किसी भी धर्म के अनुयाई हो। अपने धर्म ग्रंथ में लिखित इतिहास पढ़े। फिर भारत की शिक्षा प्रणाली द्वारा संचालित इतिहासकारों की पाठ्य पुस्तक पढ़े। उलझ जाओगे। दुविधा में पड़ जाओगे की क्या सच है और क्या झूठ। तो सोचे की आप के बच्चो की मानसिकता पर क्या असर होंगा इस उलझन का? पाठ्य पुस्तक में कुछ और लिखा है और धर्म पुस्तक में कुछ और? परिजन इस इतिहास को सच मानते है और अध्यापक उस पुस्तक को?तो सच क्या है ? एक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
पाठ्य पुस्तक में वर्णन है की भगवान महावीर ने जैन धर्म की स्थापना की। परन्तु जैन धर्म ग्रंथो में अनुसार तो वो 24 तीर्थकर थे। स्थापना को ऋषभ देव ने की थी।     
पाठ्य पुस्तक के अनुसार इस्लाम की स्थापना पैगम्बर हज़रत मुहम्मद ने की थी। परन्तु क़ुरान के अनुसार हज़रत इब्राहिम(अलैहि) ने की थी। हज़रत आदम(अलैहि) से लेकर हज़रत मुहम्मद(सल्ल) तक हजारों वर्षों में कई पैगम्बर हुए। इनके अनुसारहज़रत मुहम्मद(सल्ल) इस्लाम के संस्थापक नहीं थेबल्कि आह्वाहक(ईश्वर का संदेश फैलाने वाले एक पैगम्बर) थे।       
इस प्रकार के हजारों सवाल, भ्रम शामिल किए है मैंने अपनी किताब “इतिहास और मिलावट” में जिनका कोई जवाब नहीं है पाठ्य पुस्तकों में। पूरी तरह से भ्रमपूर्ण, विरोधाभासी, तथ्यहीन और तर्कहीन बातों का विस्तार से वर्णन किया गया है, साथ ही साथ इन सब सवालों के जवाब भी दिए गए है। मेरी पुस्तक “इतिहास और मिलावट” स्कूली बच्चों को जरुर पढ़ानी चाहिए।
पुस्तक का मूल्य 100 रूपये है। शिपिंग चार्ज(कूरियर शुल्क) अलग से लगेगा। 100 रूपये आप को अग्रिम भेजने होंगे। साथ ही अपना पूरा पता पिनकोड के साथ। पुस्तक भेजने के बाद मैं आप को उसकी रसीद (airway bilti) दे दूंगा। आप paytm से मुझे पैसे भेज सकते है और whatsapp facebook के जरिये अपना पता भेज सकते है। पुस्तक भेजने की रसीद भी मैं इस ही माध्यम से आप को दे दूंगा और तब आप रसीद के अनुसार बाकि पैसो का भुगतान कर सकते है। मेरा नंबर है +91- 9729295413    
ebook(सॉफ्ट कॉपी) की क़ीमत है Rs. 30/- ‘आत्मा’ के लिए और Rs. 50/- ‘इतिहास और मिलावट’ के लिए। छपी हुई (हार्ड कॉपी) लेने के लिए Rs. 80/- ‘आत्मा’ के लिए और Rs. 100/- ‘इतिहास और मिलावट’ के लिए। शिपिंग चार्ज(कूरियर शुल्क) अलग से लगेगा।
Nitin Sharma
Contact: - +91-9729295413

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