आत्मा भाग 1
आधी रात का वक्त हो चला था । दूर -दूर तक अँधेरे का राज था ।
अँधेरा इतना घना था की हाथ को हाथ दिखाई ना दे, और इस अँधेरे को चीर रही थी एक
खुली जीप की हेड लाइट । जहां भी जीप की लाइट पड़ती वही कुछ नजर आता सिर्फ पल भर के
लिए । जीप चालक एक महिला थी, स्टेप कट बाल, आधुनिक लिबास, पहने वो महिला 40 के आस पास की थी । आखेँ एक दम
लाल पर वो लाली काम की थकान की नहीं थी , बल्कि शराब के नशे की थी । इतने नशे में
होने पर भी जीप पर गजब का नियंत्रण था । जीप लगभग 80/100 की गति से दोड रही थी । तभी अचानक लाइट की रोशनी में एक
साया नजर आया । चटक काले रंग के कपडे, खुले बाल, लाल आखेँ, सफ़ेद पुतलियाँ जैसे
कोई भूत या आत्मा हो । एक लड़की का भयानक साया सिर्फ कुछ पल के लिए और यही पल काफी
थे । जीप का संतुलन ख़राब करने के लिए । महिला चालक ने एक दम से ब्रेक लगाये और
अपनी जीप को मोड़ दिया मुख्य मार्ग से एक सर्विस रोड पर । महिला अभी भी संघर्ष कर
रही और लगभग 20 फूट की दूरी पर जा कर उसने अपनी गाड़ी पर पूरा नियंत्रण कर ही लिया
था की अचानक उसका सिर पीछे की तरफ गिर गया । यूँ लगा मानो सिर और धड का कोई संबंध
ही नहीं है और सिर कटा वो धड जीप को कैसे संभालता ? वो जीप कुछ ही दूर खड़े एक पेड़
से जा टकराई । एक भयानक हादसा या हत्या? कोई नहीं जानता । दूर-दूर तक वो साया अब
नजर नहीं आ रहा था । अद्रश्य हो गया था ।
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सुबह के 8 बज चुके थे । वही जंगल , जहां रात को एक महिला की हादसे में मौत हुई थी । चारों तरफ पुलिस ।
दुर्घटना स्थल को पुलिस ने कवर कर लिया था । फॉरेंसिक वाले सबूत तलाशने में जुटे
थे । तभी एक पुलिस की जीप आ कर रुकी । जीप में कंसोली कस्बे का पुलिस प्रमुख आशीष
प्रधान था । तेज कदमों से वो दुर्घटना ग्रस्त जीप की तरफ आकर मुआयना करने लगा ।
“क्या लगता है ?” प्रधान वही खड़े अपने हवलदार से बोला ।
“दुर्घटना है सर । ये देखिये ” हवलदार जगत राम ने इतना सा
जवाब दे कर एक ड्राइविंग लाइसेंस प्रधान की तरफ बड़ा दिया ।
“गाड़ी में से ये पर्स मिला है । मरने वाली कमला डिसूजा है ।
पीटर डिसूजा की पत्नी ।
“ओह ।” स्वाभाविक
रूप से ये शब्द प्रधान के मुंह से निकले “
वो कमीना तो पूरा पुलिस विभाग अपने सिर पर उठा लेगा । “
“हाँ सर, आप जानते तो हो ही इस औरत को । दारू पी कर गाड़ी
चला रही होगी ठोक दी ।”
“पर वो नहीं मानेगा जगत , उस को और एस पी साहब को सबूत देने पड़ेंगे । “ प्रधान परेशान
था पर खुद ही बोला ।
“चलो ठीक है लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजो “ जगत को आगे की
निर्देश दे कर प्रधान वापस अपनी जीप की तरफ जाने लगा तभी उसकी नजर जीप की पिछले
हिस्से में पड़े सिर पर गई , वो वही ठिठक गया ।
अभी तक वो यही सोच रहा था की महिला का सिर पेड़ से टकराने के
कारण कट गया और वो जंगल में कही पड़ा होगा पर सिर का पीछे की तरफ गिरना हजारों सवाल
पैदा करता है ?.............
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