आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ
भारत में भयानक रूप ले चुकी भुखमरी, गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई, डूबी
हुई जी.डी.पी. और बर्बाद हो चुकी अर्थव्यस्था के समय भी सिर्फ धनतेरस के एक दिन
में 100 करोड़ का कारोबार हो गया है। लोग गहने और वाहन खरीद रहे है। और ये कारोबार
सिर्फ हिसार जैसे छोटे से शहर में हुआ है, तो बड़े शहरों में क्या आकड़े हो हो सकते
है इसका अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। खरीदारी करने वाले लोग कौन है? सब के सब
टाटा, बिडला, अंबानी, अदानी तो नहीं है। आम लोग ही है। तो वो लोग कौन है जो भूख से
मर रहे है? गरीबी और बेरोजगारी से मरे जा रहे है। कुछ रिपोर्टे बता रही थी ना की
भारत में भूख से मरने वालो की संख्याफिर या बेरोजगारी दर पकिस्तान या बांग्लादेश
से भी ज्यादा है। फिर भी कोई पाकिस्तानी या बंगलादेशी वापस अपने देश नहीं गया।
ये सब प्रोपगेंडा है, भारत को बदनाम करने का। वैसा ही प्रोपगेंडा जैसे
15-20 दिन पहले आया था। अभूतपूर्व कोयला
संकट। तीन दिन का कोयला बचा है! दो दिन का बचा है! बिजली संकट आ गया है। हरियाणा
में तो 50 प्रतिशत बिजली उत्पादन ठप हो गया था। इस सारी खबरों का सोर्स भी दैनिक
भास्कर ही था। पर क्या हुआ। कोयला संकट आते आते कहा रुक गया? गलत ट्रेन में बैठ कर
कहीं और चला गया क्या? अगर आप इस तरह के प्रोपगेंडा
को नहीं समझ रहे है तो यक़ीनन आप का दिमाग या तो मासूम अबोध बच्चे के जैसा है या
फिर आप निपट ही मुर्ख हो।
और हाँ दीपावली उत्सव है, रोशनी का, मिठाइयों का खुशियों का, शोर का,
आतिशबाजी का और श्रद्धा का। कोई मातम नहीं है। जो घर में शांत बैठे रहे। खूब
पटाखें चलाएँ, आतिशबाजी करें। रोने वाले तो रोते ही रहेंगे। आम इंसान की तरह
त्यौहार मनाएं। बेकार में बुद्धिमान और ज्ञानी बनने का प्रयास ना करे।
आप सभी को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ