सबसे पहले
तो JNU हिंसा पर मासूम बच्चे, गरीब बच्चे आदि कहना छोड़ दो, 40 45 साल के बच्चे
नहीं होते आदमी औरत होते है, और दूसरी बात ये की गरीबो के बच्चे 40-40 साल तक पढ़ते
नहीं रहते। पूरी दुनियाँ से वामपंथ मिटता जा रहा है, भारत में भी इनकी जमीन खिसकती
जा रही है, दूसरी तरफ कांग्रेस की जमीन और झूठ की खेती भी नष्ट होती जा रही है। और
हमारे देश के छद्म उदारपंथियो के झूठ भी एक एक करके बेनकाब हो रहे है। संस्थानों
पर जो ये लोग कुंडली मार कर बैठे हुए थे। अब छोड़ने पद रहे है। सरकारी मलाई मिलना
बंद हो गई वो अलग बात है। तो अब ये कुछ ना करे ये कैसे हो सकता है ?
अभी तो
शुरुआत है, 2024 तक ये तोड़फोड़, हड़ताल, धरने,प्रदर्शन, आगजनी और दंगे फसाद बहुत
होंगे। अभी तो छात्र बनाम सरकार ही सामने आया है। फिर स्वर्ण बनाम दलित,
हिन्दू-बनाम मुस्लिम बाकि है। छेत्रवाद, आदि जैसे मुद्दे भी है अभी विपक्ष के पास।
आगे आगे देखिए अभी और क्या क्या होता है। जैसे जैसे देश के नासूर एक-एक करके खत्म
किए जाते रहेंगे वैसे-वैसे विपक्ष की बोखलाहट, इसी तरह की हिंसा और आगजनी से
परिलक्षित होती जाएगी।


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