वक़्त की कहानी मेरी जुबानी
कुछ लोगो को पूरी जिन्दगी इस बात की शिकायत रहती है की वक़्त ने उन के साथ अच्छा नहीं किया ,पर वो ये नहीं जानते की वक़्त कभी भी किसी के भी साथ इंसाफ नहीं करता , अगर आप जिन्दगी मैं सिर्फ खुशिया चाहते हो तो उन खुशियों के साथ आने वाले गम को कोंन झेलेगा , वक़्त किसी के साथ इंसाफ नहीं करता क्यों की इंसाफ करना उसका काम है ही नहीं , उस का काम तो सिर्फ चलना है , आपनी ही निश्चित गति से ,बिना किसी की परवाह किये ,सिर्फ चलना ही है वक़्त का काम , अब ये लोगो पर निर्भर करता है की वो वक़्त के साथ कदम से कदम मिला कर चलने की हिम्मत रखते है , या वक़्त से भी आगे निकलने की काबिलियत है , और या फिर वक़्त से पिछे रह जाते है , जो वक़्त के साथ चलते रहते है , वो सबसे ज्यादा खुश रहते है , जो वक़्त से आगे निकाल कर दिखाते है वक़्त उन से सर पर कामयाबी का ताज रखता है , जबकि पीछे रह्जाने वालो को वक़्त इतिहास के कूड़े दान में डाल देता है जसे वापस निकाल नामुमकिन है , इसलिए वक़्त को कोसने से कुछ नहीं होगा , कर्ता हार युग में इंसान ही होता है , कर्म उस को ही करना पड़ता है , बाकि सब को कारक है
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