न्यूटन फिल्म को आस्कर नहीं
मिलेगा। बाहुबली 2 ही सही दावेदार थी आस्कर अवार्ड की। इस फिल्म की सफलता ही आस्कर
चयन सिमिति के सदस्यों को पूरी फिल्म देखने के लिए मजबूर कर देती और फिल्म देखने
के बाद तो अवार्ड पक्का था। पर सरकार ने अपनी पुरानी प्रथा को ही निभाया। एक कमतर
और कमजोर फिल्म को आस्कर में भेज कर। वैसे भी अवार्ड हमेशा उन फिल्मो को ही मिलता
है (कुछ अपवाद छोड़ कर) जिन्हें दर्शक नहीं मिलते। सरकार चाहे तो अवार्ड खरीद सकती
है। पुरवर्ती सरकारों ने तो कई बार अपने लिए या अपनों के लिए अवार्ड ख़रीदे ही है। जैसे
तत्कालीन कांग्रेसी सरकार ने वामपंथी दबाव में आकर नोबल अवार्ड ख़रीदा था या एक महिला लेखिका के लिए
बुकर अवार्ड ख़रीदा था। भारत के दो प्रधानमंत्रियो ने तो खुद को ही भारत रत्न
अवार्ड दिया था। 2 दर्जन से ज्यादा अवार्ड तो अभी वापस भी आये है जो सरकारों ने
खैरात में बाटें थे। चलो चलता है। अभी तक नहीं मिला तो इस बार नहीं मिलेगा तो क्या
फर्क पड़ता है।
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