माननीय पूर्वप्रधान मंत्री
और भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी
भारतीय राजनीती में मेरे
आदर्श श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी, अपना जीवन पूर्ण कर चले गए। पूरा देश इस वक़्त
शोकाकुल है परन्तु मुझे यकीन है ऊपर स्वर्ग में उत्सव मनाया जा रहा होंगा क्यों की
अटल जी अब वहा निवास करेंगे। भारतीय राजनीती में मेरी रूचि का कारण अगर कोई है तो
वो अटल जी ही है। बात 94-95 की होंगी जब मुझे वोट देने का अधिकार भी नहीं मिला था।
बाल मन से मैं देखता था भारतीय नेताओ को अंग्रेजी में बोलते हुए। देश हो या विदेश,
सदन के अन्दर या बाहर हर कोई अंग्रेजी में धारा प्रवाह भाषण देता था। तब अटल जी
थे, जो आम आदमी की भाषा में बात करते थे। धारा प्रवाह शुद्ध हिंदी, पुरे गर्व से, एक
नेता जो राष्ट्र की बात करता था, भारतीयता की बात करता था, बिल्कुल वैसे जैसे
आचार्य चाणक्य करता था। इनके भाषणों ने जादू सा प्रभाव किया मेरे मन पर।
फिर इनकी सरकार बनी। गठजोड़
की राजनीती के कारण 13 दिन में गिर गई। फिर दुबारा 13 महीने सरकार चली। सिर्फ एक
वोट से वो भी गिर गई। और फिर आखिरकार अपना तीसरा कार्यकाल पूरा किया। पाकिस्तान के
साथ अच्छे संबंध बनाने के लिए दिल्ली से लाहोर बस चलाई, खुद उस बस में बैठ कर
लाहोर गए। पर पाकिस्तान ने हमें कारगिल दिया। इस युद्ध में अपनी मर्यादा में रह कर
भी पाकिस्तान को करारी मात दी। उस के बाद भी युद्ध विजेता की मानसिकता से बाहर आकर
कारगिल के खलनायक को आगरा में ससम्मान वार्ता का न्यौता दिया। जिसका जवाब
पाकिस्तान ने संसद पर हमला करके दिया। अमेरिका की नाक के नीचे पोकरण में परमाणु
परिक्षण किए। इन्होने देश को उस वक़्त संभाला जब पूरी दुनियाँ भारत के खिलाफ खड़ी थी।
राष्टव्यापी भारतीय पहचान पत्र की परिकल्पना भी उन्ही की देन थी और दूसरी दूरसंचार
क्रांति भी उन्होंने ही शुरू की।
अटल बिहारी वाजपेयी वो
इंसान थे जिनके बारे में जितना भी लिखा जाए वो कम है। ये उनके संघर्ष की हद ही थी
की वो पूरा दिन (15 अगस्त) को मौत से लड़ते रहे। शायद नहीं चाहते थे की स्वतंत्रता
दिवस का उत्सव शोक में बदले। वर्ना हर साल हम उत्सव और शोक साथ-साथ मनाते। मेरी
क्या किसी की भी औकात नहीं है की वो सिर्फ शब्दों में अटल जी के व्यक्तित्व का
वर्णन कर सके। अटल जी जैसे लोग हजारों सालो में एक बार ही पैदा होंते है।
।।भावभीनी श्रधांजलि माननीय
पूर्वप्रधान मंत्री और भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को।।
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